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Bihar AI Call Center: बिहार में शुरू होगा देश का पहला AI आधारित साइबर हेल्पलाइन सेंटर

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बिहार में साइबर अपराध रोकने के लिए 1930 हेल्पलाइन को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लैस किया जाएगा। नई AI तकनीक से शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया तेज होगी और साइबर ठगी के मामलों में त्वरित कार्रवाई संभव हो सकेगी।

पटना/आलम की खबर: बिहार अब तकनीक और डिजिटल सुरक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठाने जा रहा है। राज्य में तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराध और ऑनलाइन ठगी के मामलों पर लगाम लगाने के लिए बिहार पुलिस और साइबर अपराध एवं सुरक्षा इकाई ने नई तैयारी शुरू कर दी है। अब राज्य की 1930 साइबर हेल्पलाइन को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI तकनीक से लैस किया जाएगा। अधिकारियों का दावा है कि यह देश का पहला AI आधारित साइबर हेल्पलाइन कॉल सेंटर होगा, जिससे साइबर अपराध के मामलों में पहले से कहीं अधिक तेजी और सटीकता के साथ कार्रवाई संभव हो सकेगी।

बिहार में पिछले कुछ वर्षों के दौरान ऑनलाइन ठगी, फर्जी लिंक, OTP फ्रॉड, डिजिटल अरेस्ट, बैंक अकाउंट हैकिंग और UPI धोखाधड़ी जैसे मामलों में तेजी से वृद्धि हुई है। हर दिन बड़ी संख्या में लोग साइबर अपराध का शिकार हो रहे हैं। ऐसे में सरकार अब तकनीक की मदद से अपराधियों पर नकेल कसने की तैयारी में जुट गई है। माना जा रहा है कि AI आधारित यह नई व्यवस्था साइबर अपराध नियंत्रण की दिशा में बड़ा बदलाव साबित हो सकती है।

अधिकारियों के अनुसार अगले तीन से चार महीनों के भीतर इस हाईटेक कॉल सेंटर को पूरी तरह तैयार कर लिया जाएगा। फिलहाल 1930 हेल्पलाइन पर आने वाली शिकायतों को कर्मचारी सुनकर मैनुअल तरीके से सिस्टम में दर्ज करते हैं। इस प्रक्रिया में काफी समय लगता है और कई बार जानकारी दर्ज करने में त्रुटि की संभावना भी बनी रहती है। अभी एक शिकायत को पूरी तरह दर्ज करने में लगभग 16 से 18 मिनट का समय लग जाता है। लेकिन नई AI प्रणाली लागू होने के बाद यही काम केवल 5 से 6 मिनट में पूरा हो सकेगा।

नई तकनीक में AI आधारित इंटरफेस, रियल टाइम वॉयस टू टेक्स्ट सिस्टम और ऑटोमेटेड प्रश्नावली का इस्तेमाल किया जाएगा। जैसे ही कोई व्यक्ति हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करेगा, सिस्टम उसकी आवाज को तुरंत टेक्स्ट में बदल देगा और जरूरी जानकारी सीधे डेटाबेस में सेव हो जाएगी। इससे शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया काफी आसान और तेज हो जाएगी।

विशेषज्ञों का कहना है कि AI तकनीक के इस्तेमाल से टाइपिंग की गलती, अधूरी जानकारी और ट्रांसक्रिप्शन से जुड़ी समस्याएं काफी कम हो जाएंगी। साथ ही पुलिस और साइबर सेल के अधिकारियों को शिकायतों का विश्लेषण करने में भी आसानी होगी। इससे मामलों की जांच तेजी से आगे बढ़ सकेगी।

नई प्रणाली का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि AI साइबर ठगी के पैटर्न को बहुत तेजी से पहचान सकेगा। यदि किसी मोबाइल नंबर, बैंक खाते, UPI ID या किसी डिजिटल डिवाइस का उपयोग कई लोगों को ठगने में किया गया है, तो सिस्टम तुरंत उसका डेटा मैच कर संदिग्ध गतिविधियों की पहचान कर सकेगा। इससे पुलिस को यह समझने में मदद मिलेगी कि किस तरह के साइबर अपराध सबसे ज्यादा हो रहे हैं और किन गिरोहों की गतिविधियां अधिक सक्रिय हैं।

अधिकारियों का मानना है कि इससे साइबर अपराधियों तक पहुंचना और उनके खिलाफ कार्रवाई करना पहले से कहीं ज्यादा आसान हो जाएगा। कई बार साइबर अपराधी अलग-अलग लोगों को ठगने के लिए एक ही तकनीक या अकाउंट का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन पारंपरिक जांच में इसे समझने में समय लग जाता है। AI तकनीक इस प्रक्रिया को काफी तेज कर देगी।

साइबर अपराध के मामलों में शुरुआती दो घंटे बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इसे “गोल्डन आवर” कहा जाता है। यदि इस दौरान शिकायत दर्ज हो जाए और संबंधित बैंक या एजेंसी तक सूचना पहुंच जाए, तो ठगी गई रकम को रोकने या वापस पाने की संभावना बढ़ जाती है। फिलहाल कई मामलों में शिकायत दर्ज होने में देरी के कारण पीड़ितों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है।

नई AI प्रणाली लागू होने के बाद शिकायत दर्ज करने की गति तेज होगी और सूचना तुरंत संबंधित एजेंसियों तक पहुंच सकेगी। इससे साइबर ठगी के शिकार लोगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। अधिकारियों का कहना है कि इस तकनीक से समय की बचत होगी और कार्रवाई में तेजी आएगी।

भविष्य में इस AI कॉल सेंटर को बहुभाषी बनाने की भी योजना तैयार की जा रही है। यानी लोग हिंदी के अलावा स्थानीय भाषाओं में भी अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगे। बिहार के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों को इससे विशेष सुविधा मिलेगी, क्योंकि कई बार भाषा की समस्या के कारण लोग अपनी बात सही तरीके से नहीं रख पाते।

इसके अलावा साइबर हेल्पलाइन की क्षमता भी बढ़ाई जा रही है। वर्तमान में 1930 हेल्पलाइन पर 25 कॉल लाइनें उपलब्ध हैं। अब इन्हें बढ़ाकर 50 किया जाएगा ताकि ज्यादा लोगों की शिकायतें एक साथ सुनी जा सकें और कॉल वेटिंग की समस्या कम हो सके।

साइबर अपराध एवं सुरक्षा इकाई के आंकड़ों के अनुसार फरवरी 2026 में IVRS सिस्टम लागू होने के बाद हेल्पलाइन पर आने वाली कॉल्स की संख्या में भारी बढ़ोतरी हुई है। पहले जहां प्रतिदिन लगभग 5500 कॉल आती थीं, वहीं अब यह संख्या बढ़कर करीब 8100 तक पहुंच गई है। इसके साथ ही साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों का रजिस्ट्रेशन भी तेजी से बढ़ा है।

आईजी (साइबर) रंजीत कुमार मिश्रा ने बताया कि बिहार का 1930 हेल्पलाइन सिस्टम जल्द ही AI तकनीक से लैस होगा। उन्होंने कहा कि यह संभवतः देश का पहला AI आधारित साइबर हेल्पलाइन कॉल सेंटर होगा। उनके अनुसार इस तकनीक से शिकायत दर्ज करने में तेजी आएगी, साइबर अपराध के पैटर्न को समझने में मदद मिलेगी और कार्रवाई की प्रक्रिया अधिक प्रभावी बनेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में साइबर अपराध से लड़ने के लिए AI तकनीक बेहद अहम भूमिका निभाने वाली है। बिहार की यह पहल देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल बन सकती है। फिलहाल लोग इस नई व्यवस्था को लेकर काफी उम्मीदें जता रहे हैं और माना जा रहा है कि इससे साइबर ठगी के मामलों में कमी लाने में मदद मिल सकती है।

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